ट्रेड में सब फेयर


यह निबंध उस छात्र की कापी से लिया गया है, जिसे निबंध प्रतियोगिता में पहला स्थान मिला है। निबंध का विषय था ट्रेड फेयर-

ट्रेड फेयर देखकर हमें पता लगता कि ट्रेड चाहे जैसा हो, करने वाले उसे फेयर ही मानते है। ट्रेड फेयर में पाकिस्तानी स्टाल वाले दिल्ली का माल पाकिस्तान के नाम पर महंगा बेच रहे थे। हो सकता है कि पाकिस्तान में भारत के नाम पर पाकिस्तानी माल मिलता हो। दूर के ढोल सुहावने होते हों या नहीं, पर दूर का माल जरुर सुहाना होता है। दिल्ली वाले दिल्ली के बजाय कराची का माल खरीदने में दिलचस्पी दिखाते हैं। कराची वाले सुना है कि चीनी आइटम लेते हैं, बम से लेकर लिपस्टिक तक।

इस तरह खऱीदने बेचने से रिश्ते मजबूत होते हैं। भारत पाक संबंध मजबूत करने का एक उपाय यह है कि दोनों तरफ के लोगों को एक दूसरे का ग्राहक बना दिया जाये। इधऱ वाले समोसे ले जाकर उधऱ बेचें, उधर वाले छोले भटूरे लाकर इधऱ बेचें। तरह तरह के परस्पर कारोबार को बढ़ाने के सुपरिणाम सामने आयेंगे। हिंदुस्तान और पाकिस्तान वालों के झगड़ा खत्म हो जायेगा, अपने ग्राहकों से कोई नहीं झगड़ता। चीन और पाकिस्तान में इसी वजह से झगड़ा नहीं होता, दोनों एक दूसरे के ग्राहक हैं।

वैसे चीनी माल के ग्राहक ट्रेड फेयर में भी थे। इंडिया में सारे घटिया माल को चीन का आइटम बताकर बेचा जाता है। चांदनी चौक के एक दुकानदार का कहना है कि चीन से भी ज्यादा घटिया माल हम बना सकते हैं, पर माल चीन का ही बिकता है। इंडिया वाले भी इस तरकीब का इस्तेमाल करते हैं, देसी आइटमों की चीनी बताकर बेच देते है। सारी होशियारी पाकिस्तानियों में ही नहीं है। इंडिया वाले भी कम नहीं है।

जेबकट भी कम नहीं हैं, इस बात का अंदाज अकसर ट्रेड फेयर में होता है। कई कारोबारी अपना पंडाल लगाकर जितने नहीं कमा पाते, बगैर पंडाल लगाये जेबकट उससे ज्यादा कमा लेते हैं। इससे पता चलता है कि जो धंधे पंडाल लगाकर नहीं किये जाते,उनके कारोबारी भी ट्रेड से फेयर कमाई करके जाते हैं।

जिन दिनों ट्रेड फेयर चलता है, उन दिनों दिल्ली में दो ही तरह के कैटेगरी होती हैं, एक वो लोग, जो ट्रेड फेयर देखकर आये हैं, दूसरे वे लोग जो ट्रेड फेयर देखकर नहीं आये हैं। ट्रेड फेयर में जाने वाले पता नहीं क्यों, वहां से लौटकर यह जरुर बताते हैं कि वो वहां से क्या खऱीद कर लाये। कई परिवारों में शांति बनी रहे, इसके लिए यह जरुरी है कि सरकार ट्रेड फेयर से लौटकर उसके किस्से बताने पर प्रतिबंध लगाये।

हां, पर दिल्ली के माल को पाकिस्तानी माल बेचने वालों पर प्रतिबंध नहीं लगाना चाहिए, पाकिस्तान के झूठों को देखकर तसल्ली सी होती है कि मामला सारी तरफ एक सा ही है।

मास्टर आफ जुगाड़ मैनेजमेंट


पिछले पूरे हफ्ते खबरें आती रहीं कि आईआईएम के एमबीए के लिए आयोजित प्रवेश परीक्षा कैट पर कंप्यूटर का माऊस भारी पड़ गया। जिन्हे आगे जाकर मैनेजर बनना है, उनके लिए कैट परीक्षा ठीक से मैनेज नहीं हो पायी। इस खाकसार का मानना है, जो कंप्यूटर कैट के टाइम ठीक से काम नहीं कर रहे थे, उन पर देशी टेकनीक का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। इस खाकसार समेत कई लोग देशी तकनीकों को जानते हैं। कई बार टीवी काम नहीं करता, उसमें चांटे लगाये जायें, तो चलने लगता है। मार के आगे सिर्फ भूत ही नहीं भागता, मार के आगे टीवी भी चलता है। कंप्यूटर की ठुकाई पिटाई कैसे की जाये, इस संबंध में इसके जानकार लोग विशेष प्रकाश डाल सकते हैं। पर मसला यह है कि देसी तरकीबों का अधिकाधिक इस्तेमाल होना चाहिए।

बल्कि बाकायदा एक कोर्स बनाया जाना चाहिए-मास्टर आफ जुगाड़ मैनेजमेंट उर्फ एमजेए। एमबीए बनाम एमजीए को देखें, तो इंडिया में एमजीए की ज्यादा जरुरत है। भारतवर्ष में श्रेष्ठ जुगाड़िस्ट कैसे बना जाये, इस सवाल का जवाब देने वाला कोई कोर्स नहीं है।

जबकि मास्टर आफ जुगाड़ मैनेजमेंट की सख्त जरुरत है। इसमें निम्नलिखित को जरुर शामिल किया जाये-

1- ट्रेन में बगैर रिजर्वेशन चढ़ने पर टीटी को कैसे सैट किया जाये। टीटी के सामने किस तरह की मुख मुद्रा और कितनी असली मुद्रा पेश की जाये, ताकि न्यूनतम भावों पर रिजर्वेशन मिल सके। यह काम आसान नहीं है। मुख मुद्रा और असली मुद्रा के मामले जरा सा हेरफेर हो जाये, तो सीट निकल जाती है।

2- ड्राइविंग लाइसेंस बगैर रिश्वत दिये लेना हो, तो कौन कौन सी जुगाड़ों की जरुरत होती है। या ड्राइविंग लाइसेंस बगैर रिश्वत दिये लेना संभव भी है या नहीं, इस पर एक विराट सेमिनार का आयोजन किया जाना चाहिए। और उन्हे विशेष वक्ता के तौर पर आमंत्रित किया जाना चाहिए, जो यह क्लेम करते हों कि उन्होने बगैर रिश्वत दिये ड्राइविंग लाइसेंस हासिल किया हो।

3- चौराहे पर रेड लाइट क्रास करते समय अगर ट्रेफिक पुलिस पकड़ ले, तो किनका नाम लेकर बचा जा सकता है। हर चौराहे पर अलग अलग नामों की जरुरत हो सकती है।

4- बेहिचक निसंकोच, बिना घबराये रिश्वत कैसे दी जाये, इस विषय पर विराट सेमिनार होना चाहिए। क्योंकि अधिकांश लोग रिश्वत लेने के काबिल नहीं होते, रिश्वत देने का कर्म उन्हे जरुर करना पड़ता है, जिसके बारे में कहीं बताया नहीं जाता।

5- बल्कि पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन रिश्वत टेकनोलोजी हो सकता है। इसके तहत यह पढ़ाया जाये कि रिश्वत का स्वागत करने वाले कर्मचारियों के क्या क्या लक्षण होते हैं और कौन से कर्मचारी रिश्वत को थोड़े से संकोच के साथ स्वीकार करेंगे।

चलूं, एक युनिवर्सिटी की मीटिंग में जाना है, नये कोर्स पर काम हो रहा है-पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन झूठ मैनेजमेंट।

पैसेंजरों को सताने के कुछ उपाय

एयर इंडिया के पायलेट हड़ताल पर गये। पहले बैंक वाले सतत स्ट्राइक पर रहते थे, अब उनकी जगह पायलेटों ने ले ली है। हड़तालरत एक पायलेट ने मुझसे पूछा कि पैसेंजरों को सता कर अपनी मांगे जल्दी मनवायी जा सकती हैं। सो प्लीज पैसेंजरों को सताने के उपाय बताओ, कुछ ऐसे पायलेटोपयोगी सुझाव इस प्रकार हैं-

1- हवाई जहाज उड़ाकर रास्ते में बोला जा सकता है कि पेट्रोल खत्म हो गया। सारे पैसेंजर मिलकर पेट्रोल के पैसे दें और हमारे भत्ते बतौर फिरौती दें, तब हम और पेट्रोल डालेंगे।

2- जैसा कि प्राय बस वाले करते हैं एक घटिया से ढाबे पर बस को रोकते हैं और सवारियों को वहां खाने पर मजबूर करते हैं और वहां से मोटा कमीशन काटते हैं। वैसे ही हवाई जहाज वाले भी कर सकते हैं। रास्ते में किसी निहायत ही घटिया में रोकें, और बतौर कमीशन रकम कमायें। घटिया ढाबों की जानकारी के लिए बस वालों से संपर्क साधा जा सकता है।

3- एक प्लेन में पांच प्लेन की सवारियों को लाद दें। दो प्लेन की सवारियों के पैसे मालिक को दें, तीन के खुद रख लें। एक प्लेन में पांच की सवारी कैसे लोड की जाती हैं, यह ज्ञान सिर्फ किसी ब्लूलाइन बस वाले से मिल सकता है।

4- मुंबई जाने वाली फ्लाइट में पुणे या अहमदाबाद की सवारी कैसे बिठायी जायें, इस बारे में ब्लू लाइन वाले गाइडेंस दे सकते हैं। ब्लू लाइन वाले आईटीओ की बस में लाल किले की सवारियां बिठाते हैं। ग्रेटर कैलाश तक की सवारी आईटीओ की बस में बिठाने का हुनर ब्लू लाइन वाले रखते हैं। इंटरनेशनल फ्लाइटों के लिए वो यह बता सकते हैं कि कैसे सिडनी वाले पैसेंजरों को लंदन वाली फ्लाइट में बिठा दिया जाये, यह कह कर कि वहां से वाकिंग डिस्टेंस है, पैदल चले जाइयेगा। ब्लू लाइन वाले अपने हुनर से फ्रेंकफर्ट को कराची के पास घोषित कर सकते हैं और कोलंबो को बीजिंग के पास घोषित कर सकते हैं। ब्लू लाइनी लाजिक से बंगलूर जयपुर के पास होगा और चंडीगढ़ कलकत्ता से वाकिंग डिस्टेंस पर होगा। ब्लूलाइन बस वाले बहुत गुणी लोग हैं, सिर्फ ब्लू लाइन तक ही उनका हुनर सीमित नहीं रहना चाहिए।

5- ब्लू लाइन से हवाई जहाज चलाने वाले यह भी सीख सकते हैं कि एक दिन में बंबई से दिल्ली के पचास फेरे कैसे लगाये जायें, पचास क्यों एक सौ पचास फेरे कैसे लगाये जायें।

आइये, ब्लू लाइन वालों से निवेदन करें के पायलेटों का मार्गदर्शन करें।

नयी दिल्ली रेलवे स्टेशन वाया करनाल

तमाम दिल्लीवासियों के लिए जारी खास ट्रेफिक एडवाइजरी इस प्रकार है-

1- तमाम रैलियों औऱ रैलों के चलते लक्ष्मीनगर से नयी दिल्ली रेलवे स्टेशन जाने वाले वाया करनाल जाने के लिए तैयार रहें। आईटीओ पर ट्रेफिक को डाइवर्ट किया जायेगा। डाइवर्ट होते होते बंद करनाल तक पहुंच लेगा। वहां से शाम तक वापसी होगी, तब तक राजघाट और आईटीओ का ट्रेफिक हलका हो लेगा। इस तरह से बंदा नयी दिल्ली रेलवे स्टेशन वाया करनाल पहुंचेगा। क्या कहा-ट्रेन छूट गयी, तो ये आपकी पर्सनल प्राबलम है। आपको नयी दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुंचाने का जुगाड़मेंट किया जायेगा, कब पहुंचेंगे, यह भगवान को भी नहीं पता, वह भी रैली और रेलों वाले दिन ट्रेफिक जाम में फंसा होता है।

2- जिस दिन एक नहीं, चार रैलियां हो गयीं, उस दिन बंदा नयी दिल्ली रेलवे स्टेशन वाया जम्मू या वाया पाकिस्तान नियंत्रित कश्मीर पहुंचेगा। सेफ यह है कि बंदा लक्ष्मीनगर से नयी दिल्ली रेलवे स्टेशन के लिए निकले, तो पांच सात दिनों का खाना साथ बांध ले। क्योंकि गन्ने की रैली वाले सिर्फ गन्ना आफर कर सकते हैं, संतरे की रैली वाले सिर्फ संतरा आफर कर सकते हैं। मतलब परांठे रोटी के मामले में तो बंदे को आत्मनिर्भर ही होना पड़ेगा।

3- ऐसे ही निजामुद्दीन स्टेशन पहुंचने वाले वाया मथुरा, आगरा और ग्वालियर जाने के लिए तैयार रहें।

4- आईटीओ से जनकपुरी जाने वालों को भी तैयार रहना चाहिए कि उनके रुट डाइवर्ट होकर जयपुर, जोधपुर, जैसलमेर या बाड़मेर से निकलें।

5- गाजीपुर क्रासिंग से निकलने वाले कहीं नहीं पहुंचेगे, क्योंकि यहा परमानेंट जाम होता है-जाम या तो मेट्रो का होता है, या फिर फ्लाईओवर का, नहीं तो किसी बारात की आवाजाही का होता है, नहीं तो फिर वाहनों का नार्मल जाम होता है। गाजीपुर क्रासिंग पर बंदे को जाम की वैरायटी का अंदाज होता है। जामाधिकारस्ते मा वैरायटी कदाचन यानी तेरे बस में सिर्फ जाम में फंसना ही है, जाम की वैरायटी क्या होगी, यह तय करना तेरे हाथ में नहीं है।

6- बच्चों को नौ दिन चले अढ़ाई कोस मुहावरे का सच्चा अर्थ समझाना हो, तो उसे रैली और रैले वाले दिन बाराखंभा रोड ले जाना चाहिए। यहां पर ट्रेफिक जाम में फंसा बंदा नौ दिनों में भी अढ़ाई कोस नहीं चल पाता। पुराने मुहावरे नये हालात में कितने बेकार हैं, इसका अंदाज भी बच्चे को लग जायेगा।

7- रैली वाले दिन बच्चों को साथ लेकर जायें, ताकि दिल्ली के बच्चे गन्ना देख सकें। दिल्ली के बच्चों ने गाय, भेड़ वगैरह भी असली की नहीं देखी हैं, इसके लिए जरुरी है कि गाय पालन और भेड़ पालन करने वाले दिल्ली में आकर आंदोलन करें।

आइये, प्रार्थना करें कि गाय और भेड़ पालन करने वाले जल्दी ही दिल्ली आकर आंदोलन करें।

दिल्ली से निकलकर अपहरण


दिल्ली से निकलने वाली एक गाड़ी को मेरठ के पास रोक लिया गया। दिल्ली से निकलने वाली अमृतसर स्वर्णजयंती गाड़ी को पंजाब में किसानों ने रोक लिया। भुवनेश्वर से चली राजधानी एक्सप्रेस का नक्सलियों ने अपहरण कर लिया। रेल यात्रा का मामला भी रिस्क में कुछ कुछ हवाई यात्रा जैसा होता जा रहा है। एक जमाना था, जब डर लगता था कि दिल्ली से मुंबई के लिए उड़े, पर कहीं लाहौर ना पहुंच जाये। वैसा ही डर रेल के मामले में लगता है कि दिल्ली से चेन्नई के लिए चले और पता लगा कि थैंक्स टू नक्सली, झारखंड ना पहुंच जायें। आजकल दिल्ली से जो बाहर जाने का प्लान कर रहे हैं, उनके लिए इस खाकसार के कुछ सुझाव इस प्रकार हैं-

1- कहीं के लिए निकलें, पर झारखंड पहुंचने की तैयारी रखिये। इस इलाके में नक्सली बहुत है और अपहरण वगैरह करने की सामर्थ्य़ रखते हैं। दिल्ली से मुंबई भी जा रहे हों, तो पहले झारखंड के बारे में अध्ययन कर लें। झारखंड के जंगलों का खास तौर पर अध्ययन कर लें, क्या पता वहां कितने दिनों तक रुकना पड़ जाये।

2- दिल्ली से राजस्थान के रुट पर जा रहे हों, तो ताश और कुछ पढ़ने की किताबें रख लें, इस रुट पर अपहरण बहुत ही बोरिंग साबित होगा। आगे पीछे कई मील तक सिर्फ और सिर्फ रेत ही है।

3- दुआ करें कि आपका अपहरण केरल में हो, केरल की किसी ट्रेन में। केरल बहुत सुंदर राज्य है। खास तौर पर अगर आप अपहरणकर्ता से निवेदन करने की स्थिति में हों, तो यह निवेदन जरुर कीजिये कि अपहरण करने के बाद पानी वाले रास्तों पर जरुर ले जायें। केरल वाले मेहमानवाजी बहुत करते हैं। बस छोटी सी दिक्कत यह है कि वहां नक्सलवादी नहीं है। इसलिए वहां गैर नक्सली अपहरणकर्ताओं से ही चिरौरी करनी पड़ेगी।

4- भगवान ना करे कि आपका कभी भी मुंबई की लोकल ट्रेन में अपहरण हो। मुंबई की लोकल ट्रेन में अपहरित होकर एक घंटा भी अगर लोकल ट्रेन में ज्यादा रहना पड़ जाये, तो विकट दुर्गति हो लेती है। अपहरण हमेशा लांग रुट की गाड़ी में होना चाहिए, ताकि बैठने, लेटने की जगह कायदे से मिल जाये। फिर मुंबई में अपहरण की दिक्कत यह है कि वहां जगह ट्रेन में है, और ना ट्रेन से बाहर। झारखंड में कम से कम ट्रेन से बाहर निकल कर जंगल में आराम से सो सकता है बंदा।

आइये, प्रार्थना करें कि किसी लांग रुट की गाड़ी में ही अपहरण हो।