वित्त मंत्री को गब्बर सिंह का खत
गब्बर सिंह द्वारा वित्त मंत्री को बजट से पहले लिखा गया खत इस प्रकार है-
अरे ओ वित्तमंत्री
रामगढ़ वालों से पहले हमारे आदमी आटा, चावल, टमाटर, आलू ले आया करते थे। अब रामगढ़ वालों ने ये सब देने से मना कर दिया है। कह रहे हैं कि आटा चावल नहीं देंगे, चाहो तो कुछ शेयर ले जाओ। आटा चावल इत्ते महंगे हो लिये हैं कि अब उन्हे लोग खाने के नहीं इनवेस्टमेंट के आइटम मान रहे हैं और शेयरों को लोग खाने की बात कर रहे हैं।
मैं क्या करुंगा शेयरों का। सांभा की एडवाइज पर मैंने जिन शेयरों में इनवेस्ट किया था, उनकी पावर डाऊन पड़ी है। तेरा क्या होगा सांभा-यह धमकी मैंने सांभा को दी भी थी, तो वह हंसकर बोला कि क्या होगा, हद से हद आप ही मार देंगे, आप नहीं मारेंगे ,तो मुझे वह उधार वाले मार देंगे, जिनसे रकम लेकर मैंने तमाम शेयरों में इनवेस्ट किया था। उधर कालिया बता रहा है कि उसके चाचा, मामा, साढ़ू, दामाद जीजा सभी का यही हाल है, सबके शेयरों का पावर आफ हो रखा है। और उधारी वाले सबको परेशान कर रहे हैं।
ये क्या हाल बना दिया है इकोनोमी का, कि बंदा गब्बर सिंह से नहीं डर रहा है। उधार वालों के हाथों मरने के बजाय गब्बर सिंह से मरना पसंद कर रहा है। बहुत नाइंसाफी ये है।
रामगढ़ वाले अब कहने लगे हैं कि गब्बर सिंह तेरे लूटने के लिए कुछ बचा ही ना है। हम तो पहले ही लुट चुके हैं। मैं हैरान था क्योंकि इधर इलाके की पुलिस ने इधर लूटने की मोनोपोली सिर्फ मुझे दी हुई है। ये कौन आ गये मेरे इलाके में लूटने। बाद में पता चला कि लूटने अब मुंबई से आते है, शेयर ऊयर देकर नोट ले जाते हैं। कागज के नोट कहीं और चले जाते हैं, और शेयर का कागज इधर रह जाता है। जिसकी नाव बनाकर बच्चे नाले में डुबा देते हैं।
भई, ये क्या नये नये लुटेरे खड़े कर दिये, हमरा तो धंधा ही चौपट हो लिया है।
मेरा निवेदन है कि आप डकैती को भी इसी टाइप के धंधे में जोड़कर इसे लीगल धंधा डिक्लेयर कर दीजिये। मैं डकैती पर सर्विस टैक्स भी देने के लिए तैयार हूं। हमारे धंधे में ऐसा कंपटीशन तो पहले कभी भी नहीं था।
मुझे विश्वास है आप इस बजट में डकैती पर सर्विस टैक्स लगा देंगे।
सोचिये, वरना मेरा क्या होगा वित्तमंत्री।
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कभी कभी आपकी भूरिभूरि प्रशंसा का मन करता है। आज वही करने का मन कर रहा है। डकैती पर सर्विस टेक्स! क्या नायब और सरकार के लिये राजकोश में वृद्धि का विचार है। आप को तो वित्त सलाहकार, भारत सरकार तत्काल प्रभाव से बना देना चाहिये। फिर आप ऐसा सर्विस टेक्स आतन्कवाद, कालाबाजारी, टीटीई बाबू की दिहाडी की कमाई - इन सब पर लगवा दीजियेगा। राजकोश में इजाफा होगा और कई आम कृत्य टेक्स की नेट में आ जायेंगे।
मैं एक बार फिर प्रशंसा करता हूं जी!!!
शानदार सलाह और अनुरोध। डकैती पर जब भी सर्विस टैक्स लगेगा उसे आलोक पुराणिक टैक्स के नाम से जाना जायेगा।
उपर कमेंट कट लिया..इस पर भी सर्विस टेक्स लगा दिये हैं क्या..:)
गब्बर सिंह जी ने शेयरों में अपने निवेश के लिए सांभा को जिम्मेवार ठहरा दिया. लेकिन उन्होंने उन एनालिस्ट लोगों को जिम्मेवार नहीं ठहराया जिन्होंने बिजनेस न्यूज़ चैनल पर बैठे-बैठे उन्हें बताया था कि किन-किन शेयर में इन्वेस्ट करना है. कहीं ऐसा तो नहीं कि सिंह जी उन्हें लूट चुके हैं जो बाकी लोगों को टीवी पर बैठे-बैठे लूटते रहते हैं.
गब्बर सिंह जी शायद अपने ऊपर छापा न पड़ने से दुखी हैं. इसीलिए डकैती पर सर्विस टैक्स लगाने की बात कर रहे हैं. एक बार उनकी सर्विस पर टैक्स लगा तो उसकी चोरी भी करनी पड़ेगी. टैब कहीं जाकर छापा पड़ेगा उनके ऊपर. और एक बार छापा पड़ गया तब जाकर लोग डरेंगे उनसे. नहीं तो आजकल जनता ऐसे लोगों को डाकू बदमाश मानने से इनकार कर देती है जिनके ऊपर छापा नहीं पड़ता.
आशा है वित्तमंत्री जी सिंह जी के सुझावों पर जरूर ध्यान देंगे. आख़िर समाज के माईनोरिटी सेक्शन के बारे में सोचने की कसम खाई है उन्होंने.
यह सही है कि आंटा-दाल चावल भी अब निवेश के इश्यू हो रहे हैं. थू है ऐसे विकास और प्लानिंग पर.
आलोक जी आपने पिछ्ले कई साल से ये जो कंसल्टेंसी का काम किया हुआ है (अगडम बगडम प्राईवेट लिमिटेड का) इस्का सर्विस टैक्स जाम कराईये.. या हम से सैटल मेंट कीजीये सेंट्रल एक्साईज डिपार्टमेंट ,नई दिल्ली
का हो आलोक बबुआ ई सब का अंट-शंट बकवास कर रहे हो.
हमई पर अगर सर्भिस टैक्सवा लगा दोगे तो बहुत पछ्तावोगे.
पता है कि नही होली कब है? हाँ कब है होली?
अबरी बरस होरी मे हम तोका नाही छोडेंगे.
संभल जइयो.
अरे भाई साब यंहा तो बहुत खतरा है.
हम बाद मे मतलब होली के बाद कमेन्ट करेंगे.
धांसू आईडिया
सरदार, यहां क्या कर रहे हैं?
मैं वारी जाऊँ, इस पोस्ट पर।
गब्बर, बेटा इतने गिर गए कि एक लेखक को धमका रहे हो. मुझे कैसे गर्व होगा तुमपर? एक लेखक जिसने तुम्हें रास्ता दिखाया, जिसने तुम्हारी तकलीफों के बारे में लिखा उसे ही धमकी देना कितना जायज है?
और क्या ये चिल्लाते रहते हो कब है होली, होली कब है. ये होली के बारे में इतने आतुर क्यों रहते हो? कभी दिवाली के बारे में जानने की कोशिश की है. तीन साल हो गए, घर पर एक पैसा नहीं भेजा तुमने. कुछ अपने माँ-बाप के बारे में भी कुछ करो. जितना पैसा कमाते हो (वैसे भी अब कुछ ज्यादा नहीं कमाते), सब उस नाचने-गाने वालों के ऊपर उड़ा देते हो. मेरी हालत का अंदाजा है तुम्हें? लूट-मार से मैंने जो कुछ भी कमाया था, उसमें से आधा तो तुम्हारी ट्रेनिंग और हथियार खरीदने पर लगा दिया. बाकी जो कुछ बचा था उसे गाँव के पोस्ट ऑफिस में एम् आई एस कर रखा था. इन्टरेस्ट रेट की हालत देख रहे हो. दिनों-दिन घटता ही जा रहा है. आजकल तो खाने-पीने की तकलीफ हो रही है.
बेटा, मेरी बात पर गौर करो और अलोक पुराणिक जी से माफ़ी मांगो. आख़िर कितने लेखक हैं जो एक डाकू को रास्ता दिखाते हैं? और हाँ, तुरंत पन्द्रह हज़ार का मनी आर्डर भेजो, गाँव के बनिया के यहाँ बहुत कर्जा हो गया है. अब तो नमक देने से भी इनकार करने लगा है.
तुम्हारा पिता
हरी सिंह
अलोक जी,
सर ब्लॉग की ताकत का अंदाजा चला आज. आपकी पोस्ट क्या पब्लिश हुई, गब्बर, सांभा, कालिया तक आ पहुंचे टिपण्णी करने. और तो छोड़िये हरी सिंह जी तक आ पहुंचे.
वाह. ये हुआ न असली ब्लॉग-महिमा.
यह बताइये कि डकैती पर टैक्स के दायरे मे नेता भी आयेंगे न। यदि हाँ तो यह कभी नही लागू नही होगा। वैसे ज्यादातर लोग किसी न किसी तरह की डकैती कर रहे है। नेताओ ने नही ध्यान दिया अब तक कि डकैत भी मिलकर वोट बैक बन सकते है।
[...] लेकिन इस बार तो गज्जब हो गया. उन्होने गब्बर सिंह का जो ख़त लीक किया था उस पर दमदार टिप्पणीयाँ आयी [...]
बहुत धांसू पोस्ट लिख मारा है बाप !
वित्तमंत्री काहे को गब्बर से पंगा लें रहा है?
अरे पता नहि कि अब गब्बर वो गब्बर नहि रहा अब उस्के पास नुक्लीयर बम भि है साथ मे राकेट भि है। उडा देगा!!!
सर आपके ब्लाग को पढ़ कर व्यंग विधा के प्रबल प्रभाव का अहसास हुआ… गब्बर के मार्फत जो आपने वर्तमान सामाजिक अर्थव्यवस्था पर तीखी नज़र डाली है, वह सरकार के थिंक टैकों के लिए संज्ञान के योग्य है।