पैसेंजरों को सताने के कुछ उपाय
एयर इंडिया के पायलेट हड़ताल पर गये। पहले बैंक वाले सतत स्ट्राइक पर रहते थे, अब उनकी जगह पायलेटों ने ले ली है। हड़तालरत एक पायलेट ने मुझसे पूछा कि पैसेंजरों को सता कर अपनी मांगे जल्दी मनवायी जा सकती हैं। सो प्लीज पैसेंजरों को सताने के उपाय बताओ, कुछ ऐसे पायलेटोपयोगी सुझाव इस प्रकार हैं-
1- हवाई जहाज उड़ाकर रास्ते में बोला जा सकता है कि पेट्रोल खत्म हो गया। सारे पैसेंजर मिलकर पेट्रोल के पैसे दें और हमारे भत्ते बतौर फिरौती दें, तब हम और पेट्रोल डालेंगे।
2- जैसा कि प्राय बस वाले करते हैं एक घटिया से ढाबे पर बस को रोकते हैं और सवारियों को वहां खाने पर मजबूर करते हैं और वहां से मोटा कमीशन काटते हैं। वैसे ही हवाई जहाज वाले भी कर सकते हैं। रास्ते में किसी निहायत ही घटिया में रोकें, और बतौर कमीशन रकम कमायें। घटिया ढाबों की जानकारी के लिए बस वालों से संपर्क साधा जा सकता है।
3- एक प्लेन में पांच प्लेन की सवारियों को लाद दें। दो प्लेन की सवारियों के पैसे मालिक को दें, तीन के खुद रख लें। एक प्लेन में पांच की सवारी कैसे लोड की जाती हैं, यह ज्ञान सिर्फ किसी ब्लूलाइन बस वाले से मिल सकता है।
4- मुंबई जाने वाली फ्लाइट में पुणे या अहमदाबाद की सवारी कैसे बिठायी जायें, इस बारे में ब्लू लाइन वाले गाइडेंस दे सकते हैं। ब्लू लाइन वाले आईटीओ की बस में लाल किले की सवारियां बिठाते हैं। ग्रेटर कैलाश तक की सवारी आईटीओ की बस में बिठाने का हुनर ब्लू लाइन वाले रखते हैं। इंटरनेशनल फ्लाइटों के लिए वो यह बता सकते हैं कि कैसे सिडनी वाले पैसेंजरों को लंदन वाली फ्लाइट में बिठा दिया जाये, यह कह कर कि वहां से वाकिंग डिस्टेंस है, पैदल चले जाइयेगा। ब्लू लाइन वाले अपने हुनर से फ्रेंकफर्ट को कराची के पास घोषित कर सकते हैं और कोलंबो को बीजिंग के पास घोषित कर सकते हैं। ब्लू लाइनी लाजिक से बंगलूर जयपुर के पास होगा और चंडीगढ़ कलकत्ता से वाकिंग डिस्टेंस पर होगा। ब्लूलाइन बस वाले बहुत गुणी लोग हैं, सिर्फ ब्लू लाइन तक ही उनका हुनर सीमित नहीं रहना चाहिए।
5- ब्लू लाइन से हवाई जहाज चलाने वाले यह भी सीख सकते हैं कि एक दिन में बंबई से दिल्ली के पचास फेरे कैसे लगाये जायें, पचास क्यों एक सौ पचास फेरे कैसे लगाये जायें।
आइये, ब्लू लाइन वालों से निवेदन करें के पायलेटों का मार्गदर्शन करें।
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ब्लू-लाइन एयर!
सीखना सीखाना छोड़ें. सीधे सीधे ब्लू लाइन वालों को ही प्लेन चलाने के लिए दे दें.
why not landing direct kandhar and pilot can get more commision more than blue line.
सोच रहा हूं कि अब उपर भी लोगों का एक्सिडेंट होगा ? तब क्या तर्क देंगी शीला दीक्षित….पहले तो दिल्ली वालों को चलने की तमीज सिखा रही थी लेकिन तब क्या कहेगीं….जब आसमान में ब्लू लाइन एयर लोगों को टक्कर मारेगी। हो सकता है कि शायद कह दे दिल्ली के लोगों को भी ज्याद उड़ना नहीं चाहिये…उड़ना सीखें
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