खौफ की सुरंग
मेट्रो ट्रेन फिर ठप हो गयी। राजीव चौक के पास फंस गयी। सुरंग में फंसकर यात्री परेशान हो गये।
1- इस खाकसार का सुझाव है कि मेट्रो वालो को ट्रेन यात्रा के साथ एडवेंचर गेम्स के पैसे भी चार्ज कर लेने चाहिए। द्वारिका से राजीव चौक के सफर के एडवेंचर गेम का नाम हो सकता है-खौफ की सुरंग या सुरंग का खौफ, अंधेरे में ट्रेन, डर डर कर सफर, सफर का डर, खतरनाक सफर कुछ भी नाम हो सकता है। अंधेरे में सुरंग वैसे सबसे सटीक रहेगा। मेट्रो में सफर करने वाले यात्रियों को पहले बता दिया जाये, जैसा कि आम तौर पर विकट टाइप के झूलों की सवारी से पहले बताया जाता है कि हाई ब्लड प्रेशर के मरीज और दिल के मरीज कृपया इन झूलों की तरफ ना आयें। मौत की सुरंग से डरने वाले लोग भी मेट्रो के करीब ना आयें।
2- मेट्रो के ट्रेक के साथ एक फुटपाथ भी बनाया जाये, ताकि मौके पर यात्री फुटपाथ का भी इस्तेमाल कर सकें। कई कंपनियां दिल्ली में दौड़ का आयोजन करवाती हैं। मेट्रो मैराथन नाम से एक नया इवेंट प्लान किया जाये। इसमें नोएडा से द्वारका तक बंदे मेट्रो के साथ पर बने फुटपाथ पर बंदे दौड़ें, ताकि अभ्यास रहे। खास तौर पर द्वारिका रुट पर चलने वाली मेट्रो गाड़ियों के लिए तो फुटपाथ बना ही दिया जाये।
3- जिनका बूता फुल मैराथन दौड़ने का नहीं है, उनके लिए हाफ मैराथन या क्वार्टर मैराथन का इंतजाम किया जाये। राजेंद्र प्लेस से द्वारिका को हाफ मैराथन माना जाये। इस इवेंट के लिए स्पांसर तलाशे जायें। मेट्रो मैराथन पर काम शुरु हो ही जाना चाहिए, ताकि यात्रियों को आदत पड़ जाये, जहां मेट्रो थमे, वहां से बंदा पैदल ही मैराथन शुरु कर दे।
4- नोएडा तक के लिए मेट्रो शुरु हो चुकी है, देर सबेर गाजियाबाद भी पहुंचेगी। वैसे गाजियाबाद और यूपी के दूसरे हिस्सों में रहने वालों को मेट्रो परेशान नहीं कर पायेगी। अंधेरे का, रुके आइटमों का अभ्यास गाजियाबाद वालों को इतना है कि रोशनी आती है, तो एबनार्मल सी लगती है। कोई चीज कायदे से चलने लगे, तो एबनार्मल सी लगने लगती है। गाजियाबाद वालों के लिए ठप बिजली और अंधेरे में खड़ी मेट्रो नार्मल ही लगेगी।
5- वैसे दिल्ली में मेट्रो वाले दिल्ली के बिजली सप्लायरों से कालोबेरेशन करके पब्लिक को अंधेरे में मेट्रो की आदत डलवा देनी चाहिये। अगर मेट्रो ना सुधरे, तो दिल्ली की बिजली व्यवस्था को बिगाड़ देना चाहिए। फिर गाजियाबाद वालों की तरह दिल्ली वालों को भी अंधेरे में मेट्रो नार्मल ही लगेगी।
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मेट्रो महान है, पर प्रतिस्पर्धा में हमारी पुरानी वाली रेल भी खास बुरी नहीं है! यहां भी तरह तरह के गेम-प्रतिस्पर्धायें हो सकती हैं!
लिफ्ट का बीच मे रुकना औअर मेट्रो का बीच मे रुकना दोनो ही खौफ नाक है ..।