संडे यूं ही-विकास का नैनो माडल

वैधानिक चेतावनी-यह व्यंग्य नहीं है

खबरें बदल रही हैं। रोजगार बड़े शहरों के मुकाबले छोटे शहरों में तेजी से बढ़ रहा है। तमाम कंपनियां माल बेचने के लिए छोटे कस्बों को ज्यादा बेहतर पा रही हैं। मोबाइल सेवा देने वाली कंपनियों का कहना है कि अब विस्तार की गुंजाईश मुंबई, दिल्ली जैसे शहरों में नहीं है, बल्कि गांवों और कस्बों में विस्तार की बेहतर संभावनाएं हैं। देश के स्तर पर स्थितियां बदल रही हैं। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी स्थितियां बदल रही हैं। जिन देशों का आज कंस्ट्रक्शन उद्योग के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, दस पंद्रह साल बाद उनकी वह हैसियत नहीं रहने वाली है।

आक्सफोर्ड इकानिमिक्स की रिपोर्ट के हिसाब से 2020 तक विश्व कंस्ट्रक्शन उद्योग के केंद्र के तौर पर जो देश आज हैं, वो बदल जायेंगे। भारत, चीन, ब्राजील और रुस कंस्ट्रक्शन उद्योग के नये केंद्रों के तौर पर उभरेंगे। इस रिपोर्ट के मुताबिक 2018 तक चीन अमेरिका को पछाड़ते हुए कंस्ट्रक्शन का सबसे बड़ा बाजार हो जायेगा। इसके मुताबिक पूरे विश्व में कुल कंस्ट्रक्शन का 40 प्रतिशत कंस्ट्रक्शन आवासीय ही होगा।

भारत कंस्ट्रक्शन का बड़ा बाजार होगा, इसकी एक वजह तो साफ तौर पर यह है कि भारत में अभी बहुत शहरीकरण होना बाकी है। जैसे गांव शहरों में तबदील होंगे। खाली प्लाट, खाली खेत फ्लैटों में तबदील होंगे। कंस्ट्रक्शन बढ़ेगा। खास तौर पर उन शहरों में, जिन्हे अभी बी ग्रेड सिटी कहा जाता है। यानी जो दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े मेट्रो नहीं हैं, पर जिनमें अपार संभावनाएं हैं। हैदराबाद, सिकंदराबाद, इंदौर, जयपुर जैसे शहर इस किस्म के शहरों में शुमार किये जा सकते हैं।

उम्मीद की जानी चाहिए कि कंस्ट्रक्शन के स्वरुप में भी बदलाव आयेगा। हाल तक तमाम बिल्डरों ने उच्च वर्ग को फोकस में रखकर स्कीमें तैयार की हैं। पैंतीस लाख, पचास लाख और करोड़ों के फ्लैटों की सैकड़ों योजनाएं सामने आयी हैं। पर पांच से दस लाख रुपये के फ्लैट बनाने और बेचने में कम बिल्डरों ने दिलचस्पी दिखायी है। जिन्होने दिखायी है, वे हाल की मंदी के शिकार नहीं हुए हैं। छोटे कर्ज देने में बैंकों की दिलचस्पी भी है।

हाल की मंदी में कई बिल्डरों को समझ में आ गया है कि सिर्फ उच्च वर्ग पर फोकस करने की रणनीति बहुत खतरनाक साबित हो सकती है। कई बिल्डरों को कर्ज चुकाने के लिए अपनी संपत्तियां औने पौने दामों पर बेचनी पड़ीं, क्योंकि जिन मोटी कीमतों पर वो अपने फ्लैट बेचना चाहते थे, उन कीमतों पर खऱीदार उपलब्ध नहीं थे। कारों के बाजार से लेकर फ्लैटों के बाजार में सबकी समझ में आ रहा है कि छोटे के निर्माण में बहुत फायदा है। प्रति इकाई लाभ भले ही कम हो, पर कुल बिकी इकाइयों का वोल्यूम इतना होगा कि अच्छा खासा मुनाफा निकल सकता है। इस गणित पर नैनो कार की सफलता टिकी है। नैनो माडल कंस्ट्रक्शन के क्षेत्र में जो बिल्डर लेकर आयेगा, वह मुनाफा कमायेगा।

दरअसल यह एक चक्र है। सबसे पहले बाजार में उच्चवर्गीय ग्राहक पर फोकस किया जाता है। उच्चवर्गीय ग्राहकों का बाजार धीमे धीमे चुकने लगता है, तो फिर मध्यवर्गीय ग्राहक पर ध्यान दिया जाता है। जब मध्यवर्गीय ग्राहकों का बाजार भी धीमे धीमे चुकने लगता है, तो फिऱ निम्न आय वर्ग के बाजार को टटोला जाता है। मोबाइल सेवाओँ का बाजार इस समय यही कर रहा है। बड़े शहर और बड़े ग्राहकों पर फोकस खत्म हो चुका है, अब नया फोकस गांवों पर है और कम आय वर्ग वाले ग्राहकों पर है।

कार कंपनियां भी यही कर रही हैं। लगभग हर कार कंपनी इस समय छोटी कारों में दिलचस्पी दिखा रही है। कुछ सालों पहले छोटी कारों के बाजार में तमाम कंपनियों की इतनी दिलचस्पी नहीं थी। यह ट्रेंड अभी कंस्ट्रक्शन के बाजार में देखी जानी बाकी है। इसकी वजह यह है कि हाल तक तमाम कंस्ट्रक्शन कंपनियों को उच्च आय वर्ग पर फोकस करने से ही फुरसत नहीं थी। पति पत्नी दोनो साफ्टवेयर इंजीनियर, या पति पत्नी दोनों ही मीडिया में कार्यरत एक लाख रुपये से ज्यादा की पारिवारिक आमदनी। चालीस हजार प्रतिमाह की घर की ईएमआई ये अफोर्ड कर सकते थे, सो साठ लाख से अस्सी लाख तक के मकान इनको बेचे गये। पर मंदी में पता चला कि एक की नौकरी गयी, तो मकान की किस्त देना तो दूर, घर चलाना तक मुश्किल हो गया। इस तरह की स्थितियों के बाद बिल्डरों की हालत पतली हुई है। देने वालों ने डिफाल्ट किया, तो इन बिल्डरों के लिए आगे कर्ज चुकाना मुश्किल हुआ। कई बिल्डरों ने हाल के महीनों में अपना दिवाला निकाला है या अपनी प्रतिष्ठा को धूमिल करते हुए डिफाल्ट किया है।

यानी उच्च और मध्यवर्गीय माडल कंस्ट्रक्शन के बाजार में फिलहाल पिटता दिख रहा है। फोकस का अगला केंद्र निश्चय ही निम्न आय वर्ग के उपभोक्ता और अपेक्षाकृत छोटे शहर होंगे। आने वाले कुछ साल सिर्फ भारत और चीन जैसे देशों के ही नहीं होंगे, बल्कि इनमें भी विकास के नैनो माडल के होंगे, जिसके कम आय वर्ग पर सच में ध्यान दिया जायेगा और उनके लिए मकान किसी जनहित योजना के तहत नहीं, बल्कि मुनाफा कमाने के लिए पेश किये जायेंगे। छोटे शहरों में इसकी शुरुआत हो चुकी है। पर इसका बड़े स्तर पर विस्तार होना अभी बाकी है।

4 Responses to “संडे यूं ही-विकास का नैनो माडल”

  1. uchch staraya jaankari ke liye sadhuvaad.

  2. जय हो। बहुत दिन बाद दिखे इतवारी लाल।

  3. excellent storke for business world i do think if india follow like UAE AND SINGAPUR Construction. no need empty land and agriculture system.
    please you are requested you shold recommend to coorporate agriculutur forming so we can more develop and more stayem /lemon brother.

  4. मैं तो गांव की तरफ लौटने की सोच रहा हूं।

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