Posted on July 29th, 2009 by alok
दिल्ली नेता प्रधान होने के साथ-साथ एक्सपर्ट प्रधान शहर भी है।
एक्सपर्ट इधऱ बता रहे हैं कि सस्ताई मच गयी है। आफीशियल महंगाई दर जिस रफ्तार से गिर रही है, उस रफ्तार से तो नेताओँ का ईमान तक नहीं गिरता। अरहर के भाव नब्बे रुपये किलो हो लिये हैं, यह अफवाह थी। [...]
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Posted on July 27th, 2009 by alok
निम्नलिखित निबंध उस छात्र का है, जिसने निबंध प्रतियोगिता में पहला स्थान हासिल किया है, निबंध का विषय था-सूर्यग्रहण।
सूर्यग्रहण का हमारे जीवन में घणा महत्व है। हमारे जीवन से ज्यादा सूर्यग्रहण का महत्व टीवी चैनलों के लिए है। सूर्यग्रहण आते ही टीवी चैनलों के मजे आ जाते हैं। पब्लिक सूर्यग्रहण के खतरों [...]
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Posted on July 23rd, 2009 by alok
यह निबंध उस छात्र का है, जिसे निबंध प्रतियोगिता में पहला पुरस्कार मिला है। निबंध का विषय था-आतंकवाद और मीडिया।
पत्रकारिता का छात्र होने के नाते मैं कह सकता हूं कि टीवी को धुआंधार टीआरपी जिन वजहों से मिलती है, उनमें भूत, प्रेत, चुड़ैल, कसब और ऐसे तत्व भी शामिल हैं।
मीडिया [...]
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Posted on July 22nd, 2009 by alok
खबरें हैं कि आर्मी के कई मामले ढीले चल रहे हैं। जितनी तोपें खरीदी जानी चाहिए थीं,उतनी तोपें नहीं खरीदी गयीं। लड़ाकू जहाज भी लक्ष्य से कम खऱीदे गये। भारतीय आर्मी में नगर निगम का सा माहौल बन रहा है। कुछेक मामलों में आर्मी में डीडीएगिरी होने का शुबहा भी है। यहां तो ठीक [...]
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Posted on July 21st, 2009 by alok
दिल्ली के स्कूलों का एक अघोषित उद्देश्य यह भी है कि पेरेंट्स को भी प्रोग्रेस, ज्ञान और विद्या के पथ पर अग्रसर करते रहे हैं। संस्कृत के एक श्लोक का आशय है कि विद्यार्थिनो को कुत सुख यानी विद्यार्थियों को सुख कहां। सो दिल्ली के स्कूल पेरेंट्स के सुख हरकर उन्हे भी नयी [...]
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