राहत ए जरदारी

सन् 2008 की बाजार रिपोर्ट इस प्रकार है-
2008 में टेस्ट क्रिकेट के भाव गिरे, और ट्वेंटी ट्वेंटी के भाव ऊपर गये। पब्लिक ने ट्वेंटी ट्वेंटी में बहुत तालियां बजायी, यह कनफ्यूजन है कि चीयर लीडरानियों को देखकर या फिर बैटिंग बालिंग को देखकर। खैर ट्वेंटी ट्वेंटी में कैटरीना [...]

मृतकों की प्रेस कांफ्रेंस

तरह तरह के बवालों, सवालों से परेशान होकर रामचरित मानस में मन लगा रहा था-पढ़ रहा था-मूंदहु आंख कतहू कुछ नाही।
पर आंख मूंदकर पड़े रहो, तो भी बम धमाके तो सुनायी पड़ ही जाते हैं, चैन कैसे मिले।
पर अब जरदारी साहब को फालो करके मैं चैन में आ गया हूं, कुछ टेंशन होता है, [...]

सांता इन थाना

बहुत उम्मीदें थी सांता से, कि आयेंगे और सस्ते आलू चावल कुछ देंगे। पर सांता नहीं आये, क्यों नहीं आये। ना आने के निम्नलिखित कारण हो सकते हैं-
1- किसी नेता की बर्थडे सेलिब्रेशन की उगाही में ना धर लिये गये हों। किसी नेता की बर्थ डे के आसपास यूपी में टहलना डेंजर है। नेता इधर के [...]

संडे यूं ही-आंकड़ों में कमी के बावजूद

वैधानिक चेतावनी-यह व्यंग्य नहीं है
थोक मूल्य सूचकांक का आंकड़ा गिर रहा है और इसका क्रेडिट लेने में सरकार चूक नहीं रही है। केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम् अभी भी वित्त मंत्री की तरह बातें करते हुए बयान दे रहे हैं कि होम लोन और सस्ते हो जायेंगे। इस तरह की बातों से एक छद्म किस्म [...]

बयानों में आत्मनिर्भरता

आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई की प्रोग्रेस इस प्रकार है-
1- केंद्रीय विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी कह रहे हैं कि हमें, खुद हमें ही कड़े कदम उठाने पड़ेंगे, पूरी दुनिया से ज्यादा उम्मीद नहीं की जा सकती। इसका मतलब यह लगाया जाये कि अब प्रणव मुखर्जी अमेरिका की कोंडालिजा राइज के बयानों के सहारे नहीं चलेंगे, रोज खुद [...]