हलवाईगिरी से निपटेंगे

कड़ाई से निपटने के बोरा भर के बयानों के बाद फिर महरौली दिल्ली में धमाका हो गया ।
फिर सब तरफ यही बयान आ रहे हैं-आतंकवादियों का मुकाबला कड़ाई से किया जायेगा। बच्चो बताओ इसका क्या मतलब है-क्लास में मैंने पूछा।
जी मतलब यह हुआ कि मंत्री लोग आतंकवाद के मुकाबले को हलवाईगिरी के अंदाज में लेते [...]

जिम्मेदारी रायते की है

अमेरिका में जिस तरह से बड़का -बड़का बैंक धड़ाम हो रहे हैं, उसे देखकर घणे सबक मिल रहे हैं।
1-आमदनी चवन्नी और खर्चा दस रुपैया वाला काम कोई बंदा करे, तो उसे चिरकुट कहा जायेगा, पर यही काम अगर अमेरिका में बड़े संगठन करें, तो उन्हे अमेरिकन बैंक कहा जाता है। जो काम सिंपल शर्ट [...]

संडे यूं ही-लैहमैन से ले मैन तक

सावधान आगे मौत है-
यूं यह शीर्षक किसी खौफनाक टीवी सीरियल का होना चाहिए था। किसी बेहद ही खतरनाक पहाड़ी मोड़ पर भी ऐसा लिखा हो सकता है। पर इन दिनों यह संदेश है उन निवेशकों के लिए, उन कारोबारियों के लिए जो शेयर बाजार के उतार चढ़ाव, वित्तीय जगत की बदहाली में अपना संतुलन खो [...]

बाढ़, प्लीज आओ ना

देश में जगह जगह बाढ़ आयी है, विकट चिंता और चितन का विषय हो गया है।
1-बाढ़ राहत के फंड चकाचक आ रहे हैं। फंड आने और खाने के चकाचकी सिलसिला कईयों के सपनों का सूखा खत्म कर रहा है। पर आफत यह है कि बाढ़ सब जगह नहीं आती।
एक रेगिस्तानी जिले के विधायक ने मुझसे [...]

प्रेम में कैलेंडरों का योगदान

यह निबंध उस छात्र की कापी से लिया गया है, जिसने कैलेंडर नामक विषय पर आयोजित निबंध प्रतियोगिता में टाप किया है।
कैलेंडर का आविष्कार जब नहीं हुआ था, तब इंसानी दुनिया भौत मजे की होती होगी। मसलन आदम हव्वा से ना कह पाते होंगे कि कि मंडे को भी तुमने सेब ही खिलाया था [...]