Posted on March 31st, 2008 by alok
चलती का नाम गाड़ी की बात आम तौर पर कही जाती है।
पर सच यह है कि रुकती का नाम भी गाड़ी होता है, अगर बिहार में चल रहे हों। बल्कि रुकती का नाम ही ज्यादा होता है। लुटती का नाम भी गाड़ी होता है। हां, भिड़ती हुई का [...]
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Posted on March 30th, 2008 by alok
फैशन का ग्लैमरस शो-यह शीर्षक हिंदी के एक अखबार की एक खबर का था।
इस शीर्षक में एक शब्द हिंदी का है-का।
मसला सिर्फ शीर्षक का नहीं है। सिर्फ खबर की भाषा ही नहीं इंगलिशिया रही है। बहुत कुछ इंगलिशिया रहा है। वैलंटाइन डे करीब दस साल पहले मीडिया के लिए कोई खास इवेंट नहीं हुआ करता [...]
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Posted on March 29th, 2008 by alok
हाल में मिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड्स ने इस खाकसार कुछ महानों के मिनी प्रोफाइल लिखवाये थे, कुछ इस प्रकार हैं-
रितिक रोशन
हाल में अकबर बनकर जोधा अकबर फिल्म में आये थे।
पर पब्लिक ने पसंद नहीं किया। जब चोर बनकर धूम टू में आये थे, तो पब्लिक ने बहुत पसंद किया। इससे पता चलता है कि [...]
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Posted on March 28th, 2008 by alok
हाल में मिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड ने इस खाकसार से कुछ पर्सनाल्टीज और पर्सनाल्टाज के मिनी प्रोफाइल लिखवाये हैं, कुछ इस प्रकार हैं। ,
श्री संत
यह मंकी नहीं हैं। मंकी कौन है, यह बात आप हरभजन सिंह से पूछ सकते हैं। या किसी भी मंकी से पूछ सकते हैं। बस सायमंड से ना पूछें।
श्री संत [...]
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Posted on March 27th, 2008 by alok
दो लघु नेताई कविताएं इस प्रकार हैं-
मनमोहन सिंहजी-
अब अकसर चुप चुप से रहे हैं, यूं ही कभी लब खोले हैं-
यूं यह लाइन प्रख्यात शायर फिराक गोरखपुरी साहब ने मनमोहन सिंहजी के लिए नहीं लिखी थीं।
पर यूं देखें, तो यह लाइन मनमोहन सिंहजी के लिए ही लिखी गयी थीं।
चुप रहकर मनमोहन सिंहजी [...]
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