कविता में सीनियरता राहत

बजट मूलत एक कविता है। जो हर साल वित्तमंत्री पेश करते हैं।
इस कविता का अर्थ कईयों को समझ में नहीं आता, जैसे आधुनिक कविता कईयो की समझ में नहीं आती। वैसे समझ में आ ही जाये, तो क्या तीर मार लिया जायेगा। यह सवाल अपनी जगह बराबर [...]

प्राइम टाइम का भूत

किस्सा नंबर एक –प्राइम टाइम का भूत
भूत गप कर रहे थे।
हवेली वाला भूत कह रहा था बेट्टा मैं बहुत टाप क्लास भूत हूं। करीब पाँच सौ सालों से हूं नाहर वाली हवेली में। कोई पर नहीं मारता मेरे डर से।
फाइव स्टार वाला भूत कह रहा था-अबे चोप्प मैं उस फाइव स्टार के स्टोर रुम का [...]

ठेलामय मैं सब जग जानी

ठेले वाला जा रहा था-आलू ले लो, प्याज ले लो, भिंडी ले लो।
दूसरे ठेले से आवाज आ रही थी-धोनी ले लो, सौरभ ले लो, ईशांत शर्मा ले लो।
ठेलों के साइज में फर्क है [...]

करात कालम् उर्फ राहु कालम्

घड़ी जैसा कि सब जानते हैं, अच्छी भी होती है औऱ बुरी भी।
शादी में दामाद को घड़ी देने का चलन बहुत पुराना है।
इस चलन का आशय यह है कि बेटा बहुत मौज मार ली। अब जो जीवन आने वाला है, वह तो घड़ी घड़ी, घड़ी देखकर ही कटेगा। बोले तो [...]

राज न हो, फिर भी कोष

राजकोषीय घाटा
बोले तो राज्य के खजाने में घाटा।
खजाने को घाटा लगने का कतई मतलब नहीं है कि राज वालों को घाटा लग रहा है। इसलिए कि वे सिर्फ राजकोष पर निर्भर नहीं हैं। जैसे डा अमित किडनी फेम वाले से दिल्ली पुलिस ने 19 [...]