प्रेमी बनाम कुत्ते

प्रेमी बनाम कुत्ते
आलोक पुराणिक
रेडियो से खाकसार को दो काम मिले। एक -कुत्तों के कार्यक्रम पर स्क्रिप्ट लिखनी थी और काम नंबर दो में प्रेमियों पर आधारित एक कार्यक्रम की स्क्रिप्ट भी लिखनी थी। दोनों स्क्रिप्टें अलग-अलग लिखकर दे दी गयीं।
किसी बहुत बड़े एक्सपर्ट [...]

पानात्मक च ज्ञानात्मक स्टाइल

पानात्मक च ज्ञानात्मक स्टाइल
आलोक पुराणिक
दिल्ली में ही चार इंटेलेक्चुअलों को मैं जानता हूं, जिनका बुद्धिजीवित्व नान-पानात्मक सिचुएशन में साइलेंट और घणा प्रखर हो उठता है।
आप खुद नोट कर लीजिये, जिन बंदों को पान-खाऊ मुद्राओं [...]

पान बनाम ईमान

पान बनाम ईमान
आलोक पुराणिक
वो बात नहीं रही-जो यह बात कहते हैं, उनमें भी वो बात नहीं रही।
पतन सब तरफ है।
पान की दुकानें तक इससे अछूती नहीं हैं। हाल के सालों में पान की दुकान में पान वैसे ही कम होता [...]

संडे चिरकुटई-कांपेक्ट के कांपलेक्स-व्यंग्य नहीं

वैधानिक चेतावनी-यह व्यंग्य नहीं है।
कांपेक्ट के कांपलेक्स
आलोक पुराणिक
सामने कंप्यूटर का सीपीयू खुला पड़ा है। कुछ बक्से टाइप आइटम, कुछ तार यहां से घुसते हुए, वहां से निकलते हुए।
इसी अगड़म-बगड़म से लेख निकलते हैं, रिपोर्ट निकलती हैं, जाने क्या-क्या निकलता है।
सीपीयू बंद हो जाता है, डिब्बा बाहर से कित्ता कांपेक्ट लगता है।
कांपेक्ट जो दिखता है, वह [...]

सिर्फ लेफ्ट मुड़ें उर्फ बंद दरवाजा

सिर्फ लेफ्ट मुड़ें उर्फ बंद दरवाजा
आलोक पुराणिक
इस खाकसार के हाथ लेफ्ट के एक बड़े लीडर की डायरी लग गयी है, हाल के पन्ने कुछ इस प्रकार हैं-
15 अक्तूबर 2007
ये ठीक है कि हम लेफ्ट हैं, [...]