Posted on September 22nd, 2009 by alok
पंकज आडवाणीजी विश्व के बिलियर्ड्स चैंपियन हो लिये, इस खबर से उस आरोप को बहुत बल मिला कि भारत का बहुत सा पैसा स्विस बैंकों में जमा है। और स्विस खातों के मामले में भारत बिलियर्ड्स की तरह ही आगे है। काहे से कि बचपन से ही फिल्मों में हमने देखा कि स्मगलर टाइप, [...]
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Posted on August 3rd, 2009 by alok
कवि जालीदास के वर्षा विषयक प्रसंगों का भावार्थ इस प्रकार है-
एक ही बारिश में नालियां भर चली हैं। उफना चली हैं, जैसे कम खाने की क्षमता रखने वाला कोई नेता एकाध करोड़ का हाथ मारने के बाद ही काबू से बाहर हो लेता है, वैसे ही नालियों की दशा हो गयी है। [...]
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Posted on July 22nd, 2009 by alok
खबरें हैं कि आर्मी के कई मामले ढीले चल रहे हैं। जितनी तोपें खरीदी जानी चाहिए थीं,उतनी तोपें नहीं खरीदी गयीं। लड़ाकू जहाज भी लक्ष्य से कम खऱीदे गये। भारतीय आर्मी में नगर निगम का सा माहौल बन रहा है। कुछेक मामलों में आर्मी में डीडीएगिरी होने का शुबहा भी है। यहां तो ठीक [...]
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Posted on July 15th, 2009 by alok
वह है भी और नहीं भी।
दिखता है और नहीं भी, मानो तो है, नहीं मानो तो है भी।
क्या ये बातें ब्रह्म के बारे में हो रही हैं।
नहीं जी, म्युनिसिपल कारपोरेशन आफ दिल्ली उर्फ एमसीडी के 45000 कर्मचारियों की बात हो रही है। जो हैं भी, नहीं भी। रजिस्टर [...]
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Posted on July 14th, 2009 by alok
बिजली दर्शन से जुड़े कतिपय महत्वपूर्ण पहलू इस प्रकार हैं-
जीवन क्षणभंगुरम् च बिजली घंटा भंगुरम्
ज्ञानी पुरुषस्य यह लक्षणम्,ना बिजली आने की खुशी, ना बिजली जाने का गम
भावार्थ-जीवन क्षणभंगुर है और बिजली घंटाभंगुर है। अभी आयी है, अभी चली जायेगी। कहां से आती है, कहां जाती है, बिजलीघर वालों को भी नहीं [...]
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