बिलियर्ड्स च स्विस बैंक

पंकज आडवाणीजी विश्व के बिलियर्ड्स चैंपियन हो लिये, इस खबर से उस आरोप को बहुत बल मिला कि भारत का बहुत सा पैसा स्विस बैंकों में जमा है। और स्विस खातों के मामले में भारत बिलियर्ड्स की तरह ही आगे है। काहे से कि बचपन से ही फिल्मों में हमने देखा कि स्मगलर टाइप, [...]

बची हुई नाली का टेंशन

कवि जालीदास के वर्षा विषयक प्रसंगों का भावार्थ इस प्रकार है-
एक ही बारिश में नालियां भर चली हैं। उफना चली हैं, जैसे कम खाने की क्षमता रखने वाला कोई नेता एकाध करोड़ का हाथ मारने के बाद ही काबू से बाहर हो लेता है, वैसे ही नालियों की दशा हो गयी है। [...]

आर्मी में डीडीए

खबरें हैं कि आर्मी के कई मामले ढीले चल रहे हैं। जितनी तोपें खरीदी जानी चाहिए थीं,उतनी तोपें नहीं खरीदी गयीं। लड़ाकू जहाज भी लक्ष्य से कम खऱीदे गये। भारतीय आर्मी में नगर निगम का सा माहौल बन रहा है। कुछेक मामलों में आर्मी में डीडीएगिरी होने का शुबहा भी है। यहां तो ठीक [...]

हैं भी और नहीं भी

वह है भी और नहीं भी।
दिखता है और नहीं भी, मानो तो है, नहीं मानो तो है भी।
क्या ये बातें ब्रह्म के बारे में हो रही हैं।
नहीं जी, म्युनिसिपल कारपोरेशन आफ दिल्ली उर्फ एमसीडी के 45000 कर्मचारियों की बात हो रही है। जो हैं भी, नहीं भी। रजिस्टर [...]

घंटाभंगुर बिजली

बिजली दर्शन से जुड़े कतिपय महत्वपूर्ण पहलू इस प्रकार हैं-
जीवन क्षणभंगुरम् च बिजली घंटा भंगुरम्
ज्ञानी पुरुषस्य यह लक्षणम्,ना बिजली आने की खुशी, ना बिजली जाने का गम
भावार्थ-जीवन क्षणभंगुर है और बिजली घंटाभंगुर है। अभी आयी है, अभी चली जायेगी। कहां से आती है, कहां जाती है, बिजलीघर वालों को भी नहीं [...]