Posted on January 5th, 2008 by alok
तीन मिनट के बाबाजी
इधर टीवी पर इतना ज्ञान बरस रहा है कि अपच सा हो लिया है।
एक बाबा आकर बताते हैं कि माला फेरत जुग गया……।
आगे की बात मुझे यूं समझ में आती है कि माला फेरत बहुत टाइम निकल लिया, अब तो टीवी पर आ जा। अंत काल पछतायेगा, जब प्राण जायेंगे छूट, टीवी [...]
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Posted on January 4th, 2008 by alok
मेंटल हास्पीटल में सांता क्लाज
सांता पर आरोप लगे कि एनजीओ बाजी के लपेटे में माल काट रहे हैं। वरना काहे को यूं घूम घूम कर गिफ्ट बांटे कोई।
सांता घबरा गये और बोले-ये एनजीओ क्या होता है। ये ग्रांट कहां से मिलती हैं। मैं तो यूं ही गिफ्ट बांटता फिरता हूं।
एक्जिट [...]
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Posted on January 3rd, 2008 by alok
सांता क्लाज का एनजीओ
आलोक पुराणिक
क्रिसमस न्यूईयर से निपट कर सांता झोला दाबे चला जा रहे थे दिल्ली में कुछ विद्वान मिल गये।
विद्वान कुछ कैलकुलेशन से बांच रहे थे-गुजरात में 67 परसेंट मोदीजी को 65 परसेंट कांग्रेस को। 54 स्विंग उधर, 76 स्विंग इधर मोदीजी को [...]
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Posted on January 2nd, 2008 by alok
काहे को हैप्पी हों
आलोक पुराणिक
क्यों हैप्पी हो जायें, सिर्फ इसलिए कि न्यू ईयर आ गया।
इधऱ मैंने पता किया कि क्या न्यू ईयर में आलू सस्ते हो जायेंगे या प्याज के भाव सेनसेक्स के मुकाबले कम उछलेंगे।
आलू -प्याज वाले ने मुस्कुराकर मना कर दिया।
भई तू आलू प्याज वाला [...]
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Posted on January 1st, 2008 by alok
वेलकम दस नंबरी साल
आलोक पुराणिक
2008 आ ही सा गया।
एक न्यूमरोलोजिस्ट से भविष्य बंचवाया, तो उसने बताया कि 2008 को जोड़ो, तो फिगर बनता है दस। यानी दस नंबरी साल है। इसमें दस नंबरी बंदों की मौज आयेगी। दस नंबरी कानून के हिसाब से वो होते हैं, जिनकी पुलिस थाने कचहरी में आवाजाही लगी रहती [...]
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