Posted on November 6th, 2009 by alok
संथानमजी कह रहे हैं कि हमारे परमाणु बम में दम नहीं है।
सरकार कह रही है कि संथानमजी की बात में दम नहीं है।
कुछ एक्सपर्ट कह रहे हैं कि संथानमजी भी सही हैं और सरकार भी।
पब्लिक समझ नहीं पा रही है कि किसकी बात को दमदार माना जाये।
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Posted on September 11th, 2009 by alok
किताब पर लिखे गये इस निबंध को निबंध प्रतियोगिता में पहला पुरस्कार हासिल हुआ है।
किताबों का हमारे लिए बहुत महत्व है, जिसने यह बात कही थी, उसने लगता है कि तमाम पालिटिकल पार्टियों में मचने वाले घमासान को पहले ही देख लिया था।
किताब लिखना बहुत मुश्किल काम है। फिर उससे बाद [...]
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Posted on August 28th, 2009 by alok
हाथी इकठ्ठे थे वहां, तरह तरह के।
काले हाथी, सफेद हाथी, छोटे हाथी, जंगल के हाथी, चिड़ियाघर के हाथी।
एक सीनियर हाथी बोला-सुना आपने, जिस पार्टी का निशान हाथी है, उसने हाथी की मूर्तियां बनवाने पर यह एक्सप्लेनेशन दिया है कि यह उसकी पार्टी का निशान नहीं है, बल्कि यह तो यूं ही पाया [...]
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Posted on July 11th, 2009 by alok
बजट कर प्रस्तावों पर डिस्कशन के कुछ अंश, जिन्हे अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया था।
मेरा सुझाव है कि हमें सीरियलों में चल रहे अफेयरों पर कर लगा देना चाहिए।
सीरियल में अगर अफेयर नहीं होंगे, तो उन्हे कौन देखेगा। बगैर अफेयर की लाइफ तो सब झेल रहे हैं।
मेरी राय में [...]
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Posted on July 10th, 2009 by alok
उस्ताद वित्तमंत्री का काम मजे का है, तरह तरह के घाटे बताते हैं। फोटू खिंचाते हैं। फिर कार में बैठकर चले जाते हैं। इंटरव्यू देते हैं। घाटे पर भी इंटरव्यू देते हैं। क्या बात है।
बेटा वित्तमंत्री की नौकरी घणी मुश्किल है। इत्ती कि इस नौकरी के बाद छोटी मोटी नौकरी मिलना भी मुश्किल [...]
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