साझे की हंडिया मध्यावधि पे…………….

साझे की हंडिया मध्यावधि पे…………….
आलोक पुराणिक
बेटे एक हंडियात्मक कहावत यह और है कि काठ की हंडिया एक ही बार चढ़ती है
-मैने समझाने की कोशिश की।
कहां चढ़ती है एक बार, ये तो लगातार चढ़े जा रही है। पहले भाजपा के काठ की थी, अब कांग्रेस के काठ की है। काठ अब नये टाइप का हो [...]

ऊपर वाले की हंडिया

ऊपर वाले की हंडिया
आलोक पुराणिक
कहावतें पुरानी हो ली हैं। नये बच्चों को समझाना बहुत मुश्किल है।
साझे की हंडिया चौराहे पर फूटती है-यह कहावत समझाने बच्चों को निकला, तो कुछ यूं बीती।
बेटा समझो, साझे की हंडिया, हंडिया मीन्स मिट्टी का बर्तन, वह चौराहे पर फूटती है। साझा मतलब पार्टनरशिप फर्म, [...]