मास्टर आफ जुगाड़ मैनेजमेंट
पिछले पूरे हफ्ते खबरें आती रहीं कि आईआईएम के एमबीए के लिए आयोजित प्रवेश परीक्षा कैट पर कंप्यूटर का माऊस भारी पड़ गया। जिन्हे आगे जाकर मैनेजर बनना है, उनके लिए कैट परीक्षा ठीक से मैनेज नहीं हो पायी। इस खाकसार का मानना है, जो कंप्यूटर कैट के टाइम ठीक से काम नहीं कर रहे थे, उन पर देशी टेकनीक का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। इस खाकसार समेत कई लोग देशी तकनीकों को जानते हैं। कई बार टीवी काम नहीं करता, उसमें चांटे लगाये जायें, तो चलने लगता है। मार के आगे सिर्फ भूत ही नहीं भागता, मार के आगे टीवी भी चलता है। कंप्यूटर की ठुकाई पिटाई कैसे की जाये, इस संबंध में इसके जानकार लोग विशेष प्रकाश डाल सकते हैं। पर मसला यह है कि देसी तरकीबों का अधिकाधिक इस्तेमाल होना चाहिए।
बल्कि बाकायदा एक कोर्स बनाया जाना चाहिए-मास्टर आफ जुगाड़ मैनेजमेंट उर्फ एमजेए। एमबीए बनाम एमजीए को देखें, तो इंडिया में एमजीए की ज्यादा जरुरत है। भारतवर्ष में श्रेष्ठ जुगाड़िस्ट कैसे बना जाये, इस सवाल का जवाब देने वाला कोई कोर्स नहीं है।
जबकि मास्टर आफ जुगाड़ मैनेजमेंट की सख्त जरुरत है। इसमें निम्नलिखित को जरुर शामिल किया जाये-
1- ट्रेन में बगैर रिजर्वेशन चढ़ने पर टीटी को कैसे सैट किया जाये। टीटी के सामने किस तरह की मुख मुद्रा और कितनी असली मुद्रा पेश की जाये, ताकि न्यूनतम भावों पर रिजर्वेशन मिल सके। यह काम आसान नहीं है। मुख मुद्रा और असली मुद्रा के मामले जरा सा हेरफेर हो जाये, तो सीट निकल जाती है।
2- ड्राइविंग लाइसेंस बगैर रिश्वत दिये लेना हो, तो कौन कौन सी जुगाड़ों की जरुरत होती है। या ड्राइविंग लाइसेंस बगैर रिश्वत दिये लेना संभव भी है या नहीं, इस पर एक विराट सेमिनार का आयोजन किया जाना चाहिए। और उन्हे विशेष वक्ता के तौर पर आमंत्रित किया जाना चाहिए, जो यह क्लेम करते हों कि उन्होने बगैर रिश्वत दिये ड्राइविंग लाइसेंस हासिल किया हो।
3- चौराहे पर रेड लाइट क्रास करते समय अगर ट्रेफिक पुलिस पकड़ ले, तो किनका नाम लेकर बचा जा सकता है। हर चौराहे पर अलग अलग नामों की जरुरत हो सकती है।
4- बेहिचक निसंकोच, बिना घबराये रिश्वत कैसे दी जाये, इस विषय पर विराट सेमिनार होना चाहिए। क्योंकि अधिकांश लोग रिश्वत लेने के काबिल नहीं होते, रिश्वत देने का कर्म उन्हे जरुर करना पड़ता है, जिसके बारे में कहीं बताया नहीं जाता।
5- बल्कि पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन रिश्वत टेकनोलोजी हो सकता है। इसके तहत यह पढ़ाया जाये कि रिश्वत का स्वागत करने वाले कर्मचारियों के क्या क्या लक्षण होते हैं और कौन से कर्मचारी रिश्वत को थोड़े से संकोच के साथ स्वीकार करेंगे।
चलूं, एक युनिवर्सिटी की मीटिंग में जाना है, नये कोर्स पर काम हो रहा है-पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन झूठ मैनेजमेंट।
Filed under: Uncategorized


meeting se aane par is jhooth management ki pol bhi zaroor kholiega. dhanyawaad.
आईआईजे कोर्स की जरूरत आईआईएम वालों को ही सबसे ज्यादा है । शिवपाल गंज के लोग तो वैसे भी इस कला में पारंगत हैं ।
excellent strock ,it is real study and i would like if you write in english
टीटी के सामने किस तरह की मुख मुद्रा और कितनी असली मुद्रा पेश की जाये, ताकि न्यूनतम भावों पर रिजर्वेशन मिल सके।
यह काम आज तक नहीं ढंग से सीख पाया.