किताब पर ललित निबंध

किताब पर लिखे गये इस निबंध को निबंध प्रतियोगिता में पहला पुरस्कार हासिल हुआ है।
किताबों का हमारे लिए बहुत महत्व है, जिसने यह बात कही थी, उसने लगता है कि तमाम पालिटिकल पार्टियों में मचने वाले घमासान को पहले ही देख लिया था।
किताब लिखना बहुत मुश्किल काम है। फिर उससे बाद [...]

बाबा वशीकरण वाले की हेल्प

टी-20 वर्ल्ड कप से भारत बाहर हो गया।
बाहर होने के बाद के मैच में भी भारत हार गया।
टीम के एक मेंबर से मैंने पूछा -भईया टूर्नामेंट से बाहर होने के बाद तो लाज शर्म की खातिर मैच जीत लेते।

वह कहावत पढ़ने लगा-का वर्षा जब कृषि सुखानी कहावत का मर्म [...]

कुछ कठिन सवाल

इधर कुछ कठिन सवाल राष्ट्र के सामने आ पड़े हैं, जिनका जवाब नहीं सूझ रहा है।
1- सवाल यह है कि आखिर फिजा और चांद साहब का मामला क्या माना जाये, फाइनली निपट लिया मान लिया जाये। या सेमीफाइनल का दौर माना जाये। चांद जी कह रहे हैं कि उन्होने से सिर्फ दो बार तलाक [...]

आम और आदमी

भूतपूर्व पंचायत मंत्री मणिशंकर अय्यर कह रहे थे कि यह सरकार आम आदमी के लिए नहीं सोचती।
अय्यर साहब ठीक कह रहे थे- अरे सिर्फ सोचने में क्या जाता है। और सोचे भी नहीं, सिर्फ इतना भर कहने में क्या जाता है कि सोच रही है।

अय्यर साहब पंचायत के काम को देख रहे हैं, [...]

नो शादी, डिसीजन की आजादी

लेखक दूरद्रष्टा होता है, सिर्फ कविताओं, कहानियों या उपन्यास का लेखक ही हीं, नारों का लेखक भी भविष्यदर्शी होता है। छोटा परिवार, सुखी परिवार-यह नारा सत्तर या साठ के दशक में जिसने लिखा था, उसने 2009 के मई महीने में होने राजनीतिक बवाल को देख लिया था।
करुणानिधिजी का परिवार छोटा होता, तो पूरा देश [...]